आखिर कब तक हम सहेंगे?

पाकिस्तानी फौजिओ घ्वारा भारतीय सरहदमे घुसकर भारतीय सैनिको पे किये गए हमले में 5 भारतीय जवान सहीद हो गए. इसके बाद पुरे भारतमे बवाल मच गया है. नेताओमें एक होड़ सी मची है बयां देने की. कुछ लोग जानबुजकर देश के खिलाफ बयां देते है बाकि लोग उनपे बयां पे अपने बयां से हमला करते है.कई लोग सडको पे उतर आते है, नारे लगते है, नेताओ के पुतले जलाते है, दुश्मन का राष्ट्रध्वज जलाया जाता है. ऐसा लगता है जैसे देशमे क्रांति आने वाली है. हर लोग लड़ने को तैयार हो गए है. पर थोड़े दिन बाद सब कुछ ख़तम. मामला शांत होते ही लोग अपने अपने काम में लग जाते है.

ऐसी घटनाए एक बार नहीं बार बार होती है. जब देशमें कोई जगह आतंकवादी हमला होता है, ये सबकुछ होता है. जब चीन के जवान गुस आते है, ये सबकुछ होता है. पाकिस्तान हमला करता है, ये सब कुछ होता है. पर उस सबका नतीजा क्या निकलता है? कुछ नहीं. जीतनी बार ये सबकुछ होता है. संसदमे चर्चा होती है. प्राइम मिनिस्टर, विपक्ष के नेता सभी की और से बयां आते है. एक्शन कोई नहीं उठाता.

जिस देशको गालिया दी जाती है. उसी से अब बातचीत शुरू होती है. उनके नेताओको यहाँ बुलाया जाता है. करोडो रूपये उनपे खर्च किये जाते है. सभी मामले को बातचीत से सुल्जाने की बात होती है. जिस पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाये जाते थे उसी से क्रिकेट मेच खिलवाई जाती है और नारे लगनी वाली जनता उसी मेचकी महँगी टिकट खरीदकर उसका मजा उठाती है. लोग अमन की बाते करने लगते है. और इंतजार करते है दुश्मन के हमले का.

आकिर कब तक हम इस टेप को रिपीट करते रहेंगे? कब तक हम मेच खिलवाते रहेंगे? कब तक हम लोग वो मेच देखते रहेंगे? अगर हम उस मेच को देखना ही बंद कर देगे तो मेच अपने आप बंद हो जायेंगे. अगर हम इन नामर्दों को वोट की जगह चोट देंगे तो ये पुनरावर्तन जरुर अटकेगा. और एक नया दिन, नइ शुरुआत के साथ जरुर आएगा.

पाकिस्तान ने ये पहेली बार हमला नहीं किया है. उसने बार बार शांति करार का उल्लघन किय है. वो ऐसे छोटे छोटे हमले करके हमारे सेकड़ो जवान मर चूका है. पर हर बार हम उसे छोटा हमला मानकर अनदेखा करते है. और हमारी इसी गलतिका पाकिस्तान बार बार फायदा उठा रहा है. एक तरीके से पाकिस्तान भारतके साथ “साइलेंट वोर” खेल रहा है. जिसका नुकसान सिर्फ हमें ही हो रहा है, क्युकी हम उसका जवाब नहीं देते. पाकिस्तान के जवाब कभी भी भारतमे घुसकर हमला कर देते है पर हमारे सैनिको को हम उसकी मंजूरी नहीं देते. एसा क्यों? जब तक हम उनकी जमीं पे जेक उनको नहीं मारेंगे, वो बार बार हमारी जमी पे आके हमें मारेंगे. क्युकी वो लोग सिर्फ लड़ना चाहते है. कही पर भी. किसी से भी और कैसे भी.

लेखक: तेजश पटेल

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